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आर्थिक नीति-निष्क्रियता आगामी वर्ष रूपये पर और भारी पड़ेगी

RBI
 चुनाव नजदीक और जनता बेहाल व व्याकुल, महँगाई कि मार से त्रस्त जनता इस बार सबक सिखाने के मनोदशा मे है

विश्व अर्थव्यवस्था के सन् मच्छी के मध्य झूलता भारतीय रुपैय्या

इधर भारतीय रिज़र्व बैंक और भारत सरकार में दंगल चल रहा हैं, उधर, पहले से ही टूटा रुपया अब और डूबने की तैयारी में हैं। और इसका उत्तरदायित्व सीधा सीधा भारत सरकार का होगा।

जानकारों का मानना है की आगामी वर्ष में भी अमरीका और चीन के मध्य व्यापारिक मतभेद के चलते वैश्विक स्तर पर उथल पथल को रुपया नही झेल सकेगा और रूपया और अधिक टूटेगा।

ज्ञात रहे की इस उथल पथल के पूर्व एक अमरीकन डॉलर के तुलना में रूपये की कीमत में ६३.८० थी। आज ७४ में पहुँच कर भी राहत की सांस ली जा रही हैं।

यदि इन्ही कारणों को देखे तो अमरीका व् चीन के मध्य व्यापार युद्ध अभी शुरू ही हुआ है, और अगले वर्ष भी चलेगा। इसी तरह भारत में चुनावों के चलते भी अनिश्चितता की स्थिति बनी रहेगी और इसका विपरीत असर भी रूपये पर पडेगा।

Where is the promise of restoring the exchange value of the rupee to Rs 40 per US dollar? Where is the promise of creating world class Universities? Where is the promise of eliminating terrorism and militancy?

— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) November 9, 2018

ओपेक उत्पादन में कटौती के प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं

अमरीकी राष्ट्रपति की नीतियों के चलते व अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दूरदर्शिता ने डॉलर के प्रति वैश्विक निवेशकों मे आकर्षण पैदा कर दिया है।

तिस पर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों की बढ़ती दरों पर भारतीय अर्थव्यवस्था फिसलती हुई नज़र आयी।

#Oil prices rallied towards $67 after it was reported #OPEC and its partners are discussing a proposal to cut output by up to 1.4 million barrels per day (bpd), a larger figure than officials have mentioned previously.https://t.co/zEd4z6uqey

— Al Arabiya English (@AlArabiya_Eng) November 14, 2018

भारतीय अर्थव्यवस्था वस्तुओं और सेवाओं का आयात तो ज्यादा कर रहा हैं और निर्यात कम। जिससे विदेशी मुद्रा की अर्थप्राप्ति आयात व निर्यात के कुल गणना उपरान्त भारतीय चालू खाता घाटे में चल रहा है।

किसी देश में वस्तुओँ एवं सेवाओँ के आयात व निर्यात के जरिए, विदेशी मुद्रा का आगमन व गमन की अंतर को चालू खाता घाटा कहते हैं और यह हमेशा सकारात्मक होना चाहिए।

भारतीय अर्थव्यवस्था से पूँजी निकासी भी रूपये का अवमूल्यन कर रहा है।

दिसम्बर में कीमतें पर आयेगा उछाल

Sensex Dives 346 Points Amid Fresh Concerns Over Crude, Rupee pic.twitter.com/XdTfslBhU0

— MUKESH KUMAR (@mkwebdeveloper) November 12, 2018

एशियाई देशों की मुद्रा की तुलना में भारतीय रुपया की प्रदर्शन इस वर्ष का सबसे खराब एशियाई मुद्रा में से एक है।

गिरते रूपये को संभालने के लिए यदि भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दर को बढ़ाना भी चाहे तो भारत की आर्थिक स्थिति इसके लियी अभी तैयार नहीं है, घरेलू वित्तीय क्षेत्र में भी संकट के दौर से गुजर रहा है, और इसके अचानक से सुधारने के आसार कम ही हैं।

यह अब प्रमाणित हो चुका है की नोटबंदी, व वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी) का कार्यान्वयन बिना पूर्ण योजना के अंतर्गत किया गया था और इसका असर आज तक भारत की अर्थव्यवस्था झेल रही है | यह दुःख की बात हैं कि एक नेता के हाथ मे इतना अधिकार जनतंत्र मे संभव हो गया कि उसने एक अलोकतांत्रिक फैसला ले लिया और उसपर कोई भी नियंत्रण और संतुलन नहीं है।

आगामी चिनावों में जनता के समक्ष ये अधिकार होगा कि उन्हें इस सरकार की नीतियों पर विश्वास हैं या अविश्वास।


तरुण प्रकाश - मुंबई

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