AGRICULTURE : The Dangerous Agricultural Games Being Played On Indian Farmland
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समाचार पत्रों में अक्सर ऐसी खबर पढने को मिल जाती है जिसमें लिखा होता है 'चार युवक लूट की योजना बनाते धरे गए।' योजना बनाने का क्या सबूत है? योजना बना भी रहे थे या नहीं बना रहे थे। योजना अगर बन भी गई तो उस पर अमल होगा या नहीं होगा? अमल करते वक्त वह कामयाब होगी या नहीं होगी। यह भविष्य की बात है। अब लूट होगी तभी तो अपराध बनेगा न। अपराध के हुए बिना युवकों को पकड़ लिया गया और उनकेे खिलाफ केस भी दर्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं, पुलिस द्वारा उन्हें थर्ड डिग्री की सजा भी दे दी गई। इससे भी आगे चलें तो यह होता है कि जो लूट उन्होंने नहीं की थी उनका भी कबूलनामा करा लिया जाता है। ताकि अगले दिन पुलिस अधिकारी द्वारा प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी तथाकथित कामयाबी का ढिंढोरा पीटा जा सके और प्रमोशन ली जा सके।
देश प्रदेश में सियासी दल क्या कर रहे हैं? क्या वे लूट की योजना नहीं बना रहे हैं? सीधी सी बात है कि नेतागिरी करने वाले लोग केवल दाल रोटी के लिए तो हाय-तौबा मचा नहीं रहे हैं। अगर उनके दिमाग में केवल दाल रोटी या गुजारा करना होता तो दिहाड़ी मजदूरी करने की सोचते। सरकारी या गैर सरकारी नौकरी की सोचते। या फिर कोई छोटा बड़ा कारोबार कर लेते। मगर ऐसा तो कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। पंचायती चुनाव से लेकर लोकसभा व राज्यसभा चुनाव तक लोग सबकुछ दांव पर लगाने को तैयार हो रहे हैं। कजऱ् उठाने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं इज्जत और मान मर्यादा का भी कोई ख्याल नहीं है। और आगे चलें तो समाज में दंगे करवाने में भी संकोच नहीं होता।
आखिर यह सब क्यों कर रहे हैं? केवल दाल रोटी के लिए या सामान्य गुजारे के लिए तो इतना रिस्क नहीं उठाया जा सकता। गड़बड़ तो है। आजादी के बाद कुछ दाल में काला होता था, अब तो लगता है पूरी दाल ही काली हो गई है। भारत माता का इतिहास भी चीख चीख कर बता रहा है कि उसके साथ उसके अपने लोग क्या-क्या ज्यादती करते आ रहे हैं। ज्यादतियों के किस्से देश की तमाम अदालतों में ठूंसे पड़े हैं।
#मोदी_से_EVM_बचाओ
— Geet V (@geetv79) December 1, 2018
19,00,000 EVMs are Untraceable👇
RTI Reveals Huge Discrepancies in
EVM Numbers between ECIL, BEL and Election Commission
Does "Chanakya-Neeti" in New India
Boil Down to 19 Lakh Missing EVMs❓#BanEVM #ModiMadeDisaster
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सरेआम यह हो रहा है, तो ये लोग पकड़े क्यों नहीं जा रहे हैं? चोर-उचक्के तो लुकछुप कर योजना बनाते हैं लेकिन ये लोग तो सार्वजनिक रूप से मंचों पर योजना बना रहे हैं और अपने-अपने कार्यकर्ताओं को उकसा रहे हैं। सरेआम धींगामस्ती। सरेआम जाति, धर्म, राष्ट्रीयताï, व निजता के विरुध जहर उगला जा रहा है। सरकार में बैठे लोग भी वही भाषा बोल रहे हैं और विपक्ष वालों का तो कहना ही क्या है। शालीनता व तहज़ीब की तमाम मर्यादाओं को तार तार किया जा रहा है। जो सरकार में पहले रह चुके हैं वे फिर सरकार में आने की जी तोड़ योजना बना रहे हैं।
उनसे पूछा जाए कि पहले ऐसा कौनसा कार्य शेष रह गया था जो अब करना चाहते हैं। अगर वह कार्य इतना ही जरूरी है तो हाल फिलहाल सरकार में बैठे लोगों से कहकर करालें। मगर नहीं करा रहे हैं। इसका सीधा सा मतलब यह नहीं निकलता कि वह कार्य राष्टï्रहित में नहीं होगा। इसलिए जनता व सरकार के सामने नहीं रखा जा रहा है। ऐसा क्या है कि सरकरार में आने के बाद ही वह कार्य होगा। आज देश की जनता जागरूक हो चुकी है। वह इन सब नेताओं से पूछना चाह रही है कि राजनीति में आने के बाद उन्होंने कितना धन बटोरा? कहां कहां प्रोपर्टी बनाई? पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक हो ताकि जनता माने कि हां ये लोग सच में राष्टï्र भक्त हैं। इनको फिर से सरकार चलाने का मौका मिलना चाहिए। मगर ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। कोई नेता लूट की योजना बनाते नहीं पकड़ा जा रहा है। और न शायद पकड़ा जाएगा। मानो यह उनका जन्मसिद्ध अधिकार हो ।
मनोज प्रभाकर, रोहतक, वरिष्ठ पत्रकार-011-91-9813617360
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